महान योद्दा, दमदार रणनीतिकार: राजा को न्याय दिलाने मैदान में प्रजा!

आगरा, उत्तर प्रदेश : आगरा का एक कार्यक्रम खूब चर्चा में है, जहां राजा को न्याय दिलाने के लिए प्रजा ने हुंकार भरी है. इस दौरान खास से लेकर आमजन तक एक साथ, एक स्वर में राजा को न्याय दिलाने के लिए आवाज बुलंद करते नजर आए. हम बात कर रहे हैं, सनातन धर्म रक्षक राजा मानसिंह आमेर की… जिनकी 475वीं जयंती की पूर्व संध्या पर आगरा के होटल विक्रम पैलेस में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन हुआ. इसमें समाज के हर वर्ग के लोगों की न सिर्फ साझेदारी दिखी बल्कि गजब का समन्वय भी नजर आया.
इस दौरान भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर बी.डी. शुक्ला ने कहा कि राजा मानसिंह आमेर के 24वें कच्छवाहा राजपूत राजा थे, जिन्हें ‘मान सिंह प्रथम’ के नाम से भी जाना जाता है. उनका जन्म 21 दिसंबर 1550 को आमेर, राजस्थान में हुआ था. आज हम उनकी जयंती मना रहे हैं. मैं पूरे विश्वास के साथ कह रहा हूं, “राजा मान सिंह अकबर के नवरत्नों में से एक थे और उनकी सेना के प्रधान सेनापति थे, इस बात की चर्चा हर कोई करता है, लेकिन उनकी सनातन धर्म के रक्षक होने पर कोई कुछ कहना नहीं चाहता. जबकि उन्होंने लगभग 7,000 मंदिरों को बचाया और कई धार्मिक स्थलों का निर्माण करवाया, जिसमें वृंदावन का सात मंजिला कृष्णजी (गोविंददेव जी) का मंदिर सबसे महत्वपूर्ण है. उडीसा के जगन्नाथ मंदिर का भी वजूद भी उनकी ही वजह से है. इसके साथ उन्होंने आमेर किले के मुख्य महलों का निर्माण भी करवाया था. अगर राजा मानसिंह को न्याय नहीं मिला तो आने वाली पीढ़ियां हमें माफ नहीं करेंगी. ”
राजा मानसिंह आमेर फाउंडेशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता नरेंद्र सिंह निभेडा ने जोर देकर कहा कि देश में एक धड़ा हमारे राजा को “जयचंद” कहता है, लेकिन ऐसा कहने की कोई ठोस वजह नहीं है. दरअसल हम गलत इतिहास का शिकार हो गए. मुगलों के पक्ष में लिखने वाले लेखकों ने सनातन धर्म में फूट डाले के लिए तरह तरह की भ्रांतियां पैदा की तो देश के शुरुआती शिक्षामंत्रियों ने भी उनकी छवि को जानबूझकर खराब करने की कोशिश की. यही नहीं, राजा मानसिंह और महाराणा प्रताप को एक दूसरे का बैरी दिखाने का प्रयास किया गया, जबकि दोनों कभी एक दूसरे से लड़े ही नहीं. राजा मानसिंह आमेर से तो अकबर भी डरता था.
राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी रहीं और समाजसेविका रीना सिंह ने कहा, ‘हम अपनी आने वाली पीढ़ी को सही इतिहास बताने निकले हैं, ताकि वो सम्मान के साथ कह सके राजा मानसिंह आमेर सनातन धर्म रक्षक, महान योद्दा, बलशाली सेनापति, अभेद रणनीतिकार थे. 63 साल के जीवन में 77 बड़े युद्ध लड़े, लेकिन एक भी नहीं हारे. अफगानिस्तान तो आज भी उनकी मार नहीं भूला है.
इस कार्यक्रम में आगरा महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाहा, गिरिराज सिंह कुशवाहा, खैरागढ़ विधायक भगवान सिंह कुशवाहा, भानू प्रताप सिंह, मधुकर चर्तुवेदी, आदर्शनंदन गुप्ता, सीमा मोरवाल राठौर, राजा मानसिंह आमेर फाउंडेशन के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बलराम सिंह चौहान समेत कई अन्य अतिथियों ने अपनी बात रखी. सबने एक स्वर में कहा” राजा” को न्याय मिलना चाहिए.
राजा मानसिंह आमेर की 475वीं जयंती के कार्यक्रम का संचालन रुबी शाक्या और अजय राज सिंह कुशवाहा ने किया. इस दौरान राजेंद्र सिंह जी, ठाकुर देवेन्द्र राजावत, राजपाल सिंह कछवाहा, नरेंद्र सिंह आमेरिया,चेतन प्रताप सिंह जादौन, देवेन्द्र सिंह तरकर, सीमा चौहान, राजेश कुमार राजावत, अमित कुशवाहा, प्रवीना राजावत पार्षद,


