डॉ. एमपीएस वर्ल्ड स्कूल में राष्ट्रीय गणित दिवस का भव्य आयोजन: श्रीनिवास रामानुजन के आदर्शों से विद्यार्थियों ने ली प्रेरणा

डॉ. एमपीएस वर्ल्ड स्कूल में राष्ट्रीय गणित दिवस के अवसर पर अत्यंत उत्साह और गरिमा के साथ विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में गणित के प्रति रुचि विकसित करना तथा उन्हें महान भारतीय गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन के जीवन से प्रेरणा दिलाना रहा।
इस अवसर पर विद्यार्थियों ने गणित के विभिन्न सिद्धांतों को सरल, रोचक और प्रयोगात्मक ढंग से प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में रामानुजन के जीवन, उनकी अध्ययन शैली और दिनचर्या पर आधारित एक प्रभावशाली नाटिका रही, जिसमें उनकी एकाग्रता, संघर्ष और गणित के प्रति समर्पण भाव को सजीव रूप में प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के दौरान गणित से जुड़ी अनेक शैक्षिक व रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिनका उद्देश्य विद्यार्थियों में तार्किक सोच, समस्या-समाधान क्षमता और आत्मविश्वास को बढ़ाना रहा।
विद्यालय के अध्यक्ष स्क्वाड्रन लीडर ए के सिंह ने अपने सारगर्भित संबोधन में विद्यार्थियों को जीवन के गूढ़ मंत्र दिए। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि शिक्षा केवल उपाधियाँ प्राप्त करने का माध्यम नहीं बल्कि जीवन जीने की वह कला है जो व्यक्ति को आत्मनिर्भर, विवेकशील और संस्कारवान बनाती है। गणित को केवल एक कठिन विषय के रूप में न देखें। यह हमारे मस्तिष्क को अनुशासित करने और सही निर्णय लेने का आधार है। जैसे रामानुजन ने सीमित संसाधनों और विषम परिस्थितियों में भी अपनी लगन से विश्व को अचंभित किया, ठीक वैसे ही आप भी अपने भीतर की क्षमताओं को पहचानें।
हमारी भारतीय गुरुकुल परंपरा हमें सिखाती है कि सच्ची शिक्षा वही है जो मनुष्य के चरित्र का निर्माण करे। स्वामी विवेकानंद जी के शब्दों में कहें तो हमें ऐसी शिक्षा चाहिए जिससे चरित्र बने, मानसिक शक्ति बढ़े और बुद्धि का विकास हो। आज के इस दौर में तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ नैतिक मूल्यों का होना अनिवार्य है। यदि आपके पास आत्मविश्वास और अनुशासन है, तो दुनिया की कोई भी बाधा आपको आपके लक्ष्य से डिगा नहीं सकती।
गणित हमें सिखाता है कि हर समस्या का एक समाधान होता है। बस आवश्यकता है तो उस सही फार्मूले की, जो आपके परिश्रम और धैर्य से प्राप्त होता है। आप केवल सूचनाओं के संग्रहकर्ता न बनें बल्कि ज्ञान के खोजी बनें। अपने जीवन में संस्कारों को प्राथमिकता दें क्योंकि संस्कारों के बिना शिक्षा अधूरी है। कठिन परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है और निरंतर सीखते रहने की ललक ही आपको एक सफल व्यक्तित्व बनाएगी।
विद्यालय की प्रधानाचार्या राखी जैन ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को रामानुजन के जीवन से सीख लेने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद कठिन परिश्रम, अनुशासन और लगन से असाधारण सफलता प्राप्त की जा सकती है। साथ ही उन्होंने शिक्षा को जीवन की प्रगति का आधार बताते हुए नियमित अध्ययन पर बल दिया।
इस अवसर पर विद्यालय के डीन एडमिनिस्ट्रेटर चंद्रशेखर डैंग, गौरव वर्मा, सौम्या मिश्रा, सौरभ जौहरी सहित सभी शिक्षक उपस्थित रहे।


