एनएमओ आगरा की विशेष जन-जागरूकता बैठक में गूंजा हेल्दी गट का संदेश

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एनएमओ आगरा की विशेष जन-जागरूकता बैठक में गूंजा हेल्दी गट का संदेश

आगरा।।National Medicos Organisation (एनएमओ) आगरा द्वारा “How to Make Your Gut Healthy” विषय पर एक महत्वपूर्ण जन-जागरूकता एवं चिकित्सकीय परिचर्चा का आयोजन P L Palace में किया गया। कार्यक्रम में शहर के प्रख्यात चिकित्सकों ने भाग लेकर आधुनिक जीवनशैली में बढ़ती पाचन समस्याओं और उनके समाधान पर विस्तृत चर्चा की।

 

इस अवसर पर प्रमुख रूप से डॉ. पवन गुप्ता, डॉ. अनुपम गुप्ता, डॉ. राघवेंद्र दुबे, डॉ. करन आर. रावत, डॉ. अनुश्री रावत, डॉ. अर्पिता सक्सेना, डॉ. दीपक बंसल, डॉ. शम्मी कालरा, डॉ. हरवीर चौहान, डॉ. श्वेता, डॉ. रूपल अग्रवाल, डॉ. ज्योति अग्रवाल, डॉ. मैथली, डॉ. रोहिताश यादव, डॉ. असीम गुप्ता एवं डॉ. ए.एच. नक़वी etc उपस्थित रहे।

 

 

📌 मुख्य चर्चा बिंदु – जो हर व्यक्ति को जानना जरूरी

 

🔹 **“व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी नहीं, वैज्ञानिक जानकारी पर भरोसा करें”**

डॉ. पवन गुप्ता एवं डॉ. शम्मी कालरा ने बताया कि आजकल सोशल मीडिया विशेषकर व्हाट्सएप पर मिलने वाली अप्रमाणित सलाह से बचना चाहिए। *Gut Hygiene* यानी पाचन तंत्र की स्वच्छता बनाए रखने के लिए संतुलित आहार, पर्याप्त पानी और नियमित दिनचर्या अत्यंत आवश्यक है।

 

🔹 **गट हेल्थ और डिप्रेशन का सीधा संबंध**

एनएमओ आगरा के सचिव डॉ. करन आर. रावत ने बताया कि आधुनिक जीवनशैली में गैस, एसिडिटी, कब्ज, ब्लोटिंग जैसी समस्याएँ आम हो गई हैं। यदि गट हेल्थ सही रखी जाए तो अवसाद (डिप्रेशन) जैसी मानसिक समस्याओं को भी काफी हद तक दूर रखा जा सकता है, क्योंकि *Gut-Brain Axis* सीधे रूप से जुड़ा हुआ है।

 

🔹 **हर पेट दर्द बीमारी नहीं होता**

डॉ. अर्पिता सक्सेना ने बताया कि पेट का हर दर्द किसी गंभीर रोग का संकेत नहीं होता। कई बार यह आंतों की संवेदनशीलता (Visceral Hypersensitivity) या अच्छे बैक्टीरिया की कमी के कारण भी हो सकता है। उन्होंने *Good Bacteria* की भूमिका और प्रोबायोटिक्स के महत्व पर प्रकाश डाला।

 

🔹 **अधिक तैलीय भोजन = गॉलब्लैडर स्टोन का खतरा**

डॉ. दीपक बंसल ने बताया कि अत्यधिक तैलीय एवं वसायुक्त भोजन से पित्ताशय (गॉलब्लैडर) में पथरी बनने की संभावना बढ़ जाती है।

 

🔹 **गर्भावस्था में संतुलित आहार जरूरी**

डॉ. अनुश्री रावत ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान संतुलित एवं पौष्टिक आहार न केवल मां बल्कि शिशु के गट हेल्थ के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

 

🔹 **32 बार चबाएं – पेट पर बोझ घटाएं**

डॉ. राघवेंद्र दुबे ने कहा कि मौखिक स्वास्थ्य (Oral Cavity Health) ही गट हेल्थ की पहली सीढ़ी है। भोजन को कम से कम 32 बार चबाने से पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता।

 

 

 

* **PPI (एसिडिटी की दवाइयों) का अत्यधिक प्रयोग स्थायी समाधान नहीं है।**

* आजकल की सबसे आम समस्या **Dysbiosis (आंतों के बैक्टीरिया का असंतुलन)** बन चुकी है।

* अनियमित खानपान, फास्ट फूड और तनाव गट हेल्थ के बड़े शत्रु हैं।

 

कार्यक्रम के अंत में डॉ. अनुपम गुप्ता ने सभी विशेषज्ञों एवं उपस्थित सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की जागरूकता परिचर्चाएं समाज को स्वस्थ दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

 

**संदेश स्पष्ट था – “अपना गट स्वस्थ रखें, जीवन खुशहाल बनाएं।”**