*भूख लगने का सिग्नल शरीर को कौन देता है डॉ अर्चिता महाजन*

*शरीर को कैसे पता चलता है कि पेट भर गया।पेट के भरने का संकेत मस्तिष्क तक पहुंचने में आमतौर पर 20 मिनट लगते हैं। बस यही कारण है मोटापे का*
डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रीशन डाइटिशियन एवं चाइल्ड केयर मास्टर्स डिग्री इन फूड न्यूट्रिशन एंड डाइटिशियन होम्योपैथिक फार्मासिस्ट एवं ट्रेंड योगा टीचर नॉमिनेटेड फॉर पद्म भूषण राष्ट्रीय पुरस्कार और पंजाब सरकार द्वारा सम्मानित और हिमाचल सरकार द्वारा सम्मानित और लेफ्टिनेंट गवर्नर लद्दाख श्री कविंदर गुप्ता जी द्वारा सम्मानित और चंडीगढ़ महाजन सभा अध्यक्ष श्री राम मूर्ति महाजन जी द्वारा सम्मानित ने बताया कि अक्सर जब हम खाने खा रहे होते हैं तब एक वक्त ऐसा आता है जब दिमाग कहता है कि बस पेट भर गया है. पेट के भरने का संकेत मस्तिष्क तक पहुंचने में आमतौर पर 20 मिनट लगते हैं। इसलिए, धीरे-धीरे और चबाकर खाना बेहतर होता है।लंबे समय से वैज्ञानिकों का मानना था कि भूख और तृप्ति (पेट भरना) को केवल न्यूरॉन्स यानी मस्तिष्क को संकेत देने वाली कोशिकाएं ही कंट्रोल करती हैं. लेकिन हाल ही में मैरीलैंड यूनिवर्सिटी (यूएमडी) और चिली के कॉन्सेप्सियन यूनिवर्सिटी की रिसर्च ने इस धारणा को बदल दिया है. दरअसल, वैज्ञानिकों ने दिमाग के हाइपोथैलेमस हिस्से में एक ऐसे चेन रिएक्शन (Chain Reaction) की खोज की है जो भूख और तृप्ति के बीच का कनेक्शन बताया है. यानी कि आपका पेट भर गया है, इसका सिग्नत न्यूरॉन्स नहीं बल्कि कोई और ही दिमाग तक पहुंचाता है.वैज्ञानिकों के मुताबिक, दिमाग का हाइपोथैलेमस हिस्सा शरीर की भूख और प्यास को कंट्रोल करता है. स्टडी में सामने आया है कि जब कोई खाना खाता है तो खून में ग्लूकोज लेवल बढ़ना शुरू होता है और उसे दिमाग की टैनीसाइट्स (Tanycytes) कोशिकाएं पहचान लेती हैं. ये कोशिकाएं लैक्टेट नाम का केमिकल रिलीज करती हैं और बस इसी से चेन रिएक्शन शुरू होता है और हमारे दिमाग तक सिग्नल पहुंचता है कि पेट भर गया है. अब तक माना जाता था कि एस्ट्रोसाइट्स केवल न्यूरॉन्स को सपोर्ट देने वाली कोशिकाएं हैं. लेकिन रिसर्च कहती है कि ये कोशिकाएं ही असली मैसेंजर हैं. यानी कि जब टैनीसाइट्स से लैक्टेट निकलता है तो एस्ट्रोसाइट्स एक्टिव हो जाते हैं और ग्लूटामेट नाम का सिग्नल भेजते हैं.यह सिग्नल सीधे उन न्यूरॉन्स के पास जाता है जो भूख को दबाते हैं. यानी इससे भूख बढ़ाने वाले न्यूरॉन्स शांत हो जाते हैं और दूसरी तरफ पेट भर जाने वाले सिग्नल तेज हो जाते हैं.शरीर को पेट भरने का संकेत मस्तिष्क (Brain), हार्मोन (Hormones), और पेट की नसों (Nerve endings) के जटिल तालमेल से मिलता है। जब पेट फैलता है, तो नसें मस्तिष्क को संकेत भेजती हैं। साथ ही, पाचन के दौरान आंतें पेप्टाइड YY (PYY) जैसे हार्मोन छोड़ती हैं, जो दिमाग को ‘तृप्ति’ (Satiety) या पेट भरने का अहसास कराते हैं, आमतौर पर खाने के 20-30 मिनट बाद। पेट भरने के प्रमुख संकेत और प्रक्रिया:पेट का फैलना (Stretch Sensors): जब आप खाना खाते हैं, तो पेट की दीवारें फैलती हैं। पेट में स्थित नसें इस फैलाव को महसूस करती हैं और वेगस तंत्रिका (Vagus nerve) के माध्यम से सीधे मस्तिष्क को संकेत भेजती हैं कि अब और भोजन की आवश्यकता नहीं है।
हार्मोनल प्रतिक्रिया (Hormonal Response): छोटी आंत भोजन को पचाते समय PYY (Peptide YY) नामक हार्मोन छोड़ती है। यह हार्मोन मस्तिष्क में तृप्ति केंद्र को सक्रिय करता है, जो भूख को कम करता है।
रक्त में पोषक तत्व (Blood Nutrients): भोजन पचने के बाद ग्लूकोज, फैटी एसिड और अमीनो एसिड का स्तर रक्त में बढ़ता है, जिसे मस्तिष्क द्वारा पहचान लिया जाता है, जिससे खाने की इच्छा कम हो जाती है।
समय का कारक: मस्तिष्क को पेट भरने का संकेत मिलने में 20-30 मिनट लग सकते हैं। इसलिए, जल्दी खाने से ज्यादा खाने की संभावना रहती है।
शारीरिक अहसास: पेट भरा होने पर पेट में हल्का दबाव, भारीपन या सुस्ती महसूस हो सकती है।


