धर्म से दूरी ही क्रोध की शुरुआत, भौतिकता का अंधकार समाज में बढ़ा रहा है दूरियां : रामप्रपन्नाचार्य जी महाराज
पंचेश्वर महादेव मंदिर, कालिंदीपुरम कॉलोनी में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में श्रीकृष्ण बाल लीलाओं, गोवर्धन पूजा एवं छप्पन भोग प्रसंग का हुआ भावपूर्ण वर्णन

आगरा। पंचेश्वर महादेव मंदिर, कालिंदीपुरम कॉलोनी, मऊ रोड, खंदारी बायपास चौराहा में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के पंचम दिवस पर कथा व्यास अनंत श्री विभूषित स्वामी श्री रामप्रपन्नाचार्य जी महाराज, श्रीधाम वृंदावन ने भगवान श्रीकृष्ण की मनोहारी बाल लीलाओं, गोवर्धन पूजा तथा छप्पन भोग प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा श्रवण के दौरान श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो गए और भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का स्मरण कर भाव-विभोर होते रहे।
कथा व्यास महाराजश्री ने कहा कि “जो धर्म से दूर है, वही क्रोध करता है। धर्म से दूरी ही क्रोध की शुरुआत है।” उन्होंने कहा कि क्रोध तभी उत्पन्न होता है जब मनुष्य के भीतर अहंकार, असंतोष और अधर्म का वास होता है। धर्म मन को संयम, धैर्य और क्षमा का संस्कार देता है। जो व्यक्ति धर्म के मार्ग पर चलता है, वह परिस्थितियों को समझता है, प्रतिक्रिया नहीं देता। इसलिए जीवन में शांति और संतुलन बनाए रखने के लिए धर्म का आश्रय आवश्यक है।
अपने प्रवचन में उन्होंने वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि “भौतिकता का अंधकार समाज में दूरी बना रहा है।” आज मनुष्य भौतिक सुख-सुविधाओं की दौड़ में इतना व्यस्त हो गया है कि रिश्तों की आत्मीयता, परिवार की संवेदनाएं और सामाजिक सरोकार पीछे छूटते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि “भौतिकता बढ़ रही है, आत्मीयता घट रही है। जहाँ भौतिकता का अंधकार है, वहाँ रिश्तों में दूरी है।” समाज को पुनः प्रेम, संस्कार और धर्म के सूत्र में बांधने की आवश्यकता है।
कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का अत्यंत मनोरम वर्णन किया गया। महाराजश्री ने बताया कि बालकृष्ण की प्रत्येक लीला केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि गहन आध्यात्मिक संदेशों से परिपूर्ण है। माखन चोरी, ग्वालबालों के साथ क्रीड़ा, यशोदा मैया का वात्सल्य और ब्रजवासियों का प्रेम भक्त और भगवान के मधुर संबंध का अद्वितीय उदाहरण है।
गोवर्धन पूजा प्रसंग का वर्णन करते हुए महाराजश्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र के अहंकार का निवारण करने तथा प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश देने के लिए गोवर्धन पर्वत की पूजा का विधान कराया। उन्होंने कहा कि गोवर्धन लीला हमें सिखाती है कि प्रकृति, गौ-संवर्धन और पर्यावरण संरक्षण भारतीय संस्कृति के अभिन्न अंग हैं।

कथा के मध्य गोवर्धन पूजा एवं छप्पन भोग की आकर्षक झांकी सजाई गई। विभिन्न प्रकार के व्यंजनों से सुसज्जित छप्पन भोग के दर्शन कर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो उठे। “गिरिराज धरण की जय” और “श्रीकृष्ण कन्हैया लाल की जय” के जयघोषों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं ने भजनों पर नृत्य कर अपनी भक्ति अर्पित की।
मुख्य यजमान मनीष अग्रवाल रावी, शिवानी अग्रवाल, विजय अग्रवाल, नीता अग्रवाल, पंकज अग्रवाल, नीलू अग्रवाल, सरोज बाला अग्रवाल ने कथा व्यास का पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
कथा के समापन पर सामूहिक आरती उतारी गई तथा श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, गोवर्धन पूजा और छप्पन भोग की दिव्य छटा ने उपस्थित श्रद्धालुओं के हृदयों में भक्ति, प्रेम और धर्म के प्रति नई चेतना का संचार किया। इस अवसर पर जगमोहन गौतम, विनोद यादव, भूपेंद्र चाहर, जेपी शर्मा, कृष्ण दत्त गौतम, तिलक सिंह, रामनरेश राठौर, क्षेत्रपाल सिंह, राजेश कुलश्रेष्ठ, आर.पी. सिंह, राकेश परमार, हेमेंद्र मित्तल, कमल सिंह, धर्मेंद्र प्रताप सिंह, लवकेश गौतम, धीरज सिंह राजपूत, शैलेंद्र प्रताप सिंह, यश दुबे, निशांत सिंह, पार्षद ललित गौतम, किशोरी सिंह राजपूत, दिनेश सारस्वत, वीरेंद्र कुशवाहा आदि उपस्थित रहे।


