“लाल गोपाल गुलाल हमारी आंखों में डारो जू…”
बसंत रागों और रसिया पदों के संग श्री प्रेमनिधि मंदिर में झूम उठा फागोत्सव

आगरा। नाई की मंडी स्थित श्री प्रेमनिधि मंदिर में फागोत्सव का आध्यात्मिक उल्लास चरम पर है। “खेलत वसंत वर्ग वर विट्ठलेश” और “लाल गोपाल गुलाल हमारी आंखों में डारो जू…” जैसे मधुर पदों की स्वर लहरियों के बीच ठाकुरजी के श्री चरणों में गुलाल अर्पित करते हुए भक्त भक्ति और प्रेम के रंग में सराबोर हो उठे। तानपुरे की झंकार, मृदंग की थाप और झांझ-मंजीरों की गूंज से मंदिर परिसर ब्रज की होली का सजीव स्वरूप बन गया।
श्वेत वस्त्रों पर खिली टेसू की छटा
फाल्गुन मास की रंग भरनी एकादशी पर ठाकुर श्याम बिहारी जी को विशेष रूप से श्वेत वस्त्र धारण कराए गए। जब इन वस्त्रों पर अबीर, गुलाल और टेसू (पलाश) के प्राकृतिक रंगों की वर्षा हुई, तो दर्शन की छटा अद्भुत हो उठी। वातावरण में उड़ते रंगों और पुष्पों के मध्य ऐसा प्रतीत हुआ मानो स्वयं प्रभु भक्तों संग होली खेल रहे हों।
मुख्य सेवायत हरिमोहन गोस्वामी ने बताया कि जगद्गुरु वल्लभाचार्य द्वारा स्थापित पुष्टिमार्ग की परंपरा में होली केवल उत्सव नहीं, बल्कि माधुर्य भाव से की जाने वाली विशेष सेवा है। मंदिर में प्रतिदिन ठाकुरजी के श्री चरणों में गुलाल अर्पित कर भक्त अपने प्रेम और समर्पण की अभिव्यक्ति कर रहे हैं।
सेवायत सुनीत गोस्वामी ने बताया कि रंग भरनी एकादशी के पावन अवसर पर मंदिर में फूलों की होली एवं राजसेवा का आयोजन किया गया। श्री ठाकुर श्री श्याम बिहारी जी को गुलाल अर्पित कर भक्तों ने फूलों के मध्य उत्साहपूर्वक होली खेली।
इस अवसर पर सुप्रसिद्ध भजन गायक सदानंद भट्ट ने राग बसंत, राग काफी, राग सारंग, राग गौरी और राग बिहाग में पद गायन सेवा प्रस्तुत की। अष्टछाप कवियों — जैसे सूरदास, कुंभनदास और परमानंददास — के रचित होरी, धमार और रसिया पदों के सुमधुर गायन से भक्तजन भाव-विभोर हो उठे।
तानपुरे की मधुर तान पर जब “लाल गोपाल गुलाल हमारी आंखों में डारो जू” जैसे पद गूंजे, तो संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक आनंद से भर गया। भक्तजन भक्ति की लहर में झूमते और नृत्य करते दिखाई दिए।
कार्यक्रम की व्यवस्थाएं दिनेश पचौरी, आशीष पचौरी, महेश धाकड़ अमित आदि ने संभाली।


