पानी हक है, एहसान नहीं: रिवर कनेक्ट संगोष्ठी में गूंजा जल संकट पर सख्त संदेश

आगरा।विश्व जल दिवस के अवसर पर रिवर कनेक्ट कैंपेन द्वारा आयोजित संगोष्ठी में जल संकट की भयावहता पर गंभीर मंथन हुआ। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि देश में पानी की समस्या अब भविष्य का खतरा नहीं, बल्कि वर्तमान का संकट बन चुकी है, जिस पर तत्काल ठोस कार्रवाई जरूरी है।
इस अवसर पर नृत्य ज्योति कथक केंद्र ने अपनी नई शाखा ताज नगरी फेस 2 पर बच्चों को जल प्रदूषण, जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए एक चित्रकला प्रतियोगिता और उसकी प्रदर्शनी का आयोजन किया इस प्रतियोगिता में रिवर कनेक्ट से वरिष्ठ पत्रकार पर्यावरण विद्
बृज खंडेलवाल और डॉ देवाशीष भट्टाचार्य जी ने निर्णायक की भूमिका निभाई। श्री विशाल झा ने सभी साथियों का स्वागत और आभार प्रकट किया।
कार्यक्रम के संयोजक बृज खंडेलवाल ने अपने उद्घाटन वक्तव्य में स्थिति की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि “यह कैसी विकास यात्रा है, जहां शुद्ध पेयजल तक आम आदमी की पहुंच सुनिश्चित नहीं हो पा रही?” उन्होंने साफ शब्दों में मांग की कि सुरक्षित पेयजल को मौलिक मानव अधिकार के रूप में मान्यता दी जाए और इसे कानून के दायरे में लाकर सरकारों की जवाबदेही तय की जाए।
उन्होंने चेताया कि पानी को बाजार की वस्तु बना देना सामाजिक असमानता को और गहरा कर रहा है, जहां अमीर बोतलबंद पानी खरीद रहा है और गरीब दूषित जल पीने को मजबूर है
पर्यावरणविद् डॉ देवाशीष भट्टाचार्य ने अपने वक्तव्य में गिरते भूजल स्तर और बढ़ते जल प्रदूषण पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत के पास विश्व की 18 प्रतिशत आबादी है, लेकिन केवल 4 प्रतिशत मीठा पानी उपलब्ध है। “यह संकट केवल प्राकृतिक संसाधनों की कमी का नहीं, बल्कि कुप्रबंधन और लापरवाही का परिणाम है,” उन्होंने कहा। उन्होंने वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सतत जल प्रबंधन की आवश्यकता पर जोर दिया।
संगोष्ठी में अन्य वक्ताओं में चतुर्भुजतिवारी , पद्मिनी अय्यर
डा ज्योति खण्डेलवाल, विशाल झा, राहुल नंदवंशी, दीपक राजपूत, नंदन श्रोत्रिय, पंडित जुगल किशोर शामिल रहे।
वक्ताओं ने कहा कि जल संकट का सबसे अधिक असर गरीब, महिलाओं, बच्चों और समाज के हाशिए पर खड़े वर्गों पर पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं आज भी मीलों दूर से पानी ढोने को मजबूर हैं, जिससे उनका स्वास्थ्य और समय दोनों प्रभावित होते हैं। वहीं, दूषित पानी के कारण डायरिया, हैजा और टाइफाइड जैसी बीमारियां लगातार जानलेवा बनी हुई हैं।
संगोष्ठी में शहरी जल प्रबंधन की खामियों पर भी चिंता जताई गई। पाइपलाइन लीकेज के कारण लगभग 40 प्रतिशत पानी बर्बाद हो जाता है, जबकि शहरों में टैंकर माफिया की पकड़ मजबूत होती जा रही है। बदलते मौसम, अनियमित बारिश और बढ़ती गर्मी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
वक्ताओं ने जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं की सराहना करते हुए यह भी कहा कि केवल नल कनेक्शन देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि हर घर तक नियमित और स्वच्छ जल आपूर्ति सुनिश्चित करना आवश्यक है।
तकनीक आधारित समाधान जैसे स्मार्ट मीटरिंग, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और अवैध बोरवेल पर नियंत्रण की जरूरत पर बल दिया गया। साथ ही यह भी कहा गया कि बिना मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रभावी प्रशासन के ये उपाय सफल नहीं हो सकते।
कार्यक्रम के अंत में सभी वक्ताओं ने सरकार से अपील की कि जल प्रबंधन को अधिकार आधारित दृष्टिकोण से देखा जाए। जल स्रोतों का संरक्षण, समान वितरण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को प्राथमिकता दी जाए।
रिवर कनेक्ट कैंपेन ने स्पष्ट किया कि पानी को वस्तु नहीं, बल्कि सार्वजनिक संपत्ति और हर नागरिक का अधिकार माना जाना चाहिए। चेतावनी देते हुए कहा गया कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में केवल नल ही नहीं, पूरी व्यवस्था सूखने का खतरा है।


