आगरा कॉलेज के 203 वर्षों के गौरवशाली इतिहास पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म का भव्य शुभारंभ

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आगरा कॉलेज के 203 वर्षों के गौरवशाली इतिहास पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म का भव्य शुभारंभ

आगरा। आरए मूवीज के बैनर तले आगरा कॉलेज के 203 वर्षों के गौरवशाली इतिहास पर आधारित एक विशेष डॉक्यूमेंट्री फिल्म के निर्माण का शुभारंभ 13 अप्रैल 2026 को महाविद्यालय परिसर स्थित गंगाधर शास्त्री भवन के समीप स्टाफ रूम में विधिवत मुहूर्त के साथ किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि योगेन्द्र उपाध्याय (उच्च शिक्षा मंत्री, उत्तर प्रदेश) रहे।

 

कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना के साथ हुआ। इसके उपरांत गणेश जी की प्रतिमा के समक्ष विधिवत पूजन कर कैमरे के माध्यम से मुहूर्त शॉट लिया गया। इस अवसर पर निदेशक रंजीत सामा द्वारा नारियल फोड़कर शुभारंभ किया गया, जिससे पूरे वातावरण में सांस्कृतिक गरिमा एवं आध्यात्मिकता का भाव व्याप्त हो गया।

 

यह डॉक्यूमेंट्री लगभग एक घंटे की होगी, जिसमें आगरा कॉलेज की 203 वर्षों की शैक्षिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक यात्रा को समाहित किया जाएगा। फिल्म में संस्थान की समृद्ध परंपरा, शिक्षक-छात्र संबंध, स्वतंत्रता संग्राम में योगदान देने वाले पूर्व छात्रों के संस्मरण तथा ज्ञान परंपरा को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा।

 

कार्यक्रम के दौरान इस डॉक्यूमेंट्री के लिए तैयार विशेष गीत भी प्रस्तुत किया गया,

 

*जिसके बोल*—

 

“उत्तम शिक्षा का केन्द्र है यह आगरा कॉलेज,

आगरा कॉलेज नाम है इसका”

 

—ने उपस्थित सभी जनों को भावविभोर कर दिया और संस्थान के प्रति गौरव की भावना को और सुदृढ़ किया।

 

कार्यक्रम का संचालन करते हुए प्रो. शशिकांत पांडे ने आगरा कॉलेज के गौरवशाली इतिहास पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह संस्थान स्वतंत्रता संग्राम से गहराई से जुड़ा रहा है तथा 1857 की क्रांति के दौरान भी इसका महत्वपूर्ण योगदान रहा। उस समय उपलब्ध साहित्य को अंग्रेजों द्वारा नष्ट या अन्यत्र स्थानांतरित कर दिया गया था। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वर्ष 1880 में आगरा कॉलेज को समाप्त करने का प्रयास किया गया, जिसे आगरा के जागरूक नागरिकों ने 1883 में ‘बोर्ड ऑफ ट्रस्टी’ का गठन कर विफल कर दिया। उन्होंने कहा कि आगरा कॉलेज का इतिहास अत्यंत विस्तृत है, जिसे एक घंटे की डॉक्यूमेंट्री में समेटना चुनौतीपूर्ण है, फिर भी यह प्रयास इसके प्रमुख आयामों को प्रभावी रूप में प्रस्तुत करेगा।

 

फिल्म निर्माता रंजीत सामा ने बताया कि यह परियोजना आगरा कॉलेज की ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने का एक गंभीर प्रयास है। उन्होंने कहा कि संस्थान ने सदैव पुरानी और नई दोनों पीढ़ियों को दिशा प्रदान की है तथा डॉक्यूमेंट्री में ऐतिहासिक तथ्यों, संस्मरणों एवं शिक्षकों-विद्यार्थियों के अनुभवों को समाहित किया गया है।

 

महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. सी. के. गौतम ने अपने विस्तृत संबोधन में कहा कि आगरा कॉलेज केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि ज्ञान, परंपरा और राष्ट्रनिर्माण की जीवंत धरोहर है। उन्होंने अवगत कराया कि महाविद्यालय की प्रबंध समिति द्वारा इस डॉक्यूमेंट्री के निर्माण हेतु बजट पारित किया गया है। उन्होंने कहा कि आगरा कॉलेज की शिक्षक परंपरा स्वयं में एक जीवंत इतिहास है, जिसने शिक्षा के साथ-साथ स्वतंत्रता संग्राम एवं राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह डॉक्यूमेंट्री इस गौरवशाली विरासत को सहेजने का सशक्त माध्यम बनेगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत सिद्ध होगी।

 

मुख्य अतिथि योगेन्द्र उपाध्याय ने अपने संबोधन में कहा कि आगरा कॉलेज का 203 वर्षों का इतिहास केवल एक संस्थान की कहानी नहीं, बल्कि भारत की बौद्धिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय चेतना की सशक्त यात्रा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस संस्थान ने न केवल पुरानी पीढ़ी को दिशा दी है, बल्कि नई पीढ़ी को भी निरंतर मार्गदर्शन प्रदान किया है।

 

उन्होंने इस पहल को सराहनीय बताते हुए कहा कि शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं प्राचार्य की सामूहिक परंपरा ही किसी भी संस्थान की आत्मा होती है और आगरा कॉलेज की यह परंपरा स्वयं में एक जीवंत इतिहास है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि इस विरासत को सहेजकर रखना समय की आवश्यकता है, ताकि आने वाली पीढ़ियां इससे प्रेरणा प्राप्त कर सकें।

 

उन्होंने यह भी कहा कि आगरा कॉलेज से जुड़े अनेक स्वतंत्रता सेनानियों एवं महान क्रांतिकारियों ने देश के इतिहास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जिनके संस्मरणों को इस डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से संरक्षित किया जाना अत्यंत आवश्यक है। साथ ही, ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखने के लिए “कैप्सूल” निर्माण की पहल को उन्होंने भविष्य के लिए एक मार्गदर्शक कदम बताया।

 

डॉक्यूमेंट्री का निर्माण कार्य लगभग 2–3 माह में पूर्ण कर 6 माह के भीतर रिलीज करने की योजना है। कार्यक्रम के उपरांत राष्ट्रगान “जन गण मन” के साथ समापन हुआ। इसके पश्चात महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के अध्यक्षों के वक्तव्य रिकॉर्ड किए गए तथा डॉक्यूमेंट्री की वीडियो शूटिंग औपचारिक रूप से प्रारंभ कर दी गई।

 

कार्यक्रम का संचालन प्रो. शशिकांत पांडे द्वारा किया गया तथा धन्यवाद ज्ञापन सुनीता रानी घोष ने किया। इस डॉक्यूमेंट्री के निर्देशक हेमंत वर्मा हैं।

 

कार्यक्रम में महाविद्यालय के समस्त शिक्षक उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से वाइस प्रिंसिपल प्रो. पी. वी. झा, प्रो. मृणाल शर्मा, प्रो. भूपेंद्र कुमार चिकारा, प्रो. वी. के. सिंह, प्रो. गौरव कौशिक, प्रो. रीता निगम, प्रो. डी. सी. मिश्रा, प्रो. एम. ए. खान, प्रो. संजीव शर्मा, प्रो. डी. पी. सिंह, डॉ. आनंद प्रताप सिंह, प्रो. सुनीता गुप्ता, प्रो. कल्पना चतुर्वेदी एवं प्रो. संचिता सिंह सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।