श्री राम को मानने के साथ उनके जीवन आदर्शों को अपनाना जरूरी: विमलेश त्रिवेदी
अहिल्या उद्धार और जनकपुर दर्शन प्रसंग से भक्तिरस में सराबोर हुआ महाकालेश्वर धाम
महारुद्राभिषेक एवं रुद्र महायज्ञ के साथ श्रीराम कथा के षष्ठम दिवस श्रद्धालुओं ने कमाया धर्मलाभ

आगरा। यमुना तट स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर, बूढ़ी का नगला, दयालबाग में आयोजित नौ दिवसीय श्री रुद्र महायज्ञ, महारुद्राभिषेक एवं श्रीराम कथा महोत्सव के षष्ठम दिवस श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का अनुपम संगम देखने को मिला। प्रतिदिन की भांति प्रातःकाल वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य भगवान भोलेनाथ का महारुद्राभिषेक एवं श्री रुद्र महायज्ञ संपन्न हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल का दुग्ध, गंगाजल, पंचामृत एवं विविध पूजन सामग्रियों से अभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि, राष्ट्र के कल्याण एवं विश्व शांति की कामना की।
संध्या में आयोजित श्रीराम कथा के षष्ठम दिवस चित्रकूट धाम से पधारे कथावाचक पंडित विमलेश त्रिवेदी महाराज ने अहिल्या उद्धार एवं जनकपुर दर्शन का अत्यंत मार्मिक एवं प्रेरणादायी वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का स्पर्श केवल एक पत्थर बनी अहिल्या का ही उद्धार नहीं करता, बल्कि यह संदेश देता है कि प्रभु की कृपा से मनुष्य के जीवन के सभी दोष, पाप और अज्ञान दूर हो सकते हैं। भगवान की शरण में आने वाला प्रत्येक जीव उनके करुणामय स्वरूप से नया जीवन प्राप्त करता है।
कथा व्यास ने कहा कि अहिल्या उद्धार सनातन संस्कृति में क्षमा, करुणा और ईश्वर की असीम अनुकंपा का प्रतीक है। भगवान श्रीराम किसी का तिरस्कार नहीं करते, बल्कि अपने दिव्य स्पर्श से पतित को भी पावन बना देते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि जीवन में अहंकार, ईर्ष्या और द्वेष का त्याग कर भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपनाएं।
जनकपुर प्रसंग का वर्णन करते हुए पंडित विमलेश त्रिवेदी महाराज ने कहा कि जनकपुर केवल एक नगर नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कृति, मर्यादा और भक्ति की पावन भूमि है। राजा जनक का जीवन वैराग्य, न्याय और धर्म का आदर्श था। भगवान श्रीराम के जनकपुर आगमन से संपूर्ण मिथिला आनंद और उत्सव में डूब गई। यह प्रसंग सिखाता है कि जहां धर्म, ज्ञान और विनम्रता का वास होता है, वहीं भगवान स्वयं पधारते हैं।
श्री महंत आचार्य पंडित सुनील कुमार वशिष्ठ ने बताया कि सप्तम दिवस शुक्रवार को श्री राम जानकी विवाह महोत्सव कथा प्रसंग के माध्यम से मनाया जाएगा।

कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम एवं भगवान महाकाल के जयघोष के साथ आरती में सहभागिता की और प्रसाद ग्रहण कर धर्मलाभ अर्जित किया।
इस अवसर पर रामचरण शर्मा, केके गुप्ता, देवांशु गुप्ता, बाल किशन अग्रवाल, अनीता बंसल, मनीष अग्रवाल, संजीव सिंघल, रेखा अग्रवाल, रेनू अग्रवाल, नूपुर अग्रवाल आदि उपस्थित रहे।


