श्रीमद्भागवत कथा, पूज्यश्री जया किशोरी ने दूसरे दिन किया नारायण के अवतारों का वर्णन

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संगत शकुनी जैसी खराब हो तो श्रीकृष्ण भी नहीं भाते

फतेहाबाद रोड, राजदेवम में श्रीश्याम परिवार सेवा ट्रस्ट द्वारा 23-29 जुलाई तक आयोजित की जा रही श्रीमद्भागवत कथा, पूज्यश्री जया किशोरी ने दूसरे दिन किया नारायण के अवतारों का वर्णन

 

आगरा। जीवन में मित्र बहुत महत्वपूर्ण हैं। इसलिए संगत अच्छी रखिए। संगत शकुनी जैसी हो तो व्यक्ति को श्रीकृष्ण भी नहीं भाते। हर व्यक्ति के जीवन में कोई न कोई शकुनी होता है। जिसका काम नराकात्मकता फैलाना है। इसलिए जीवन में शकुनियों से दूर रहिए। भाई-बहन, माता-पिता, पति-पत्नी, रिश्तेदार सब ईश्वर निश्चित करता है। सिर्फ मित्र ही एक ऐसे रिश्ता है, जिसे व्यक्ति खुद चुनता है। इसलिए अच्छे स्वभाव और अच्छी मानसिकता वाले रिश्ते चुनिए। फतेहाबाद रोड स्थित रोजदेवम में श्रीमद्भागवत कथा में आज व्यासपीठ पर विराजमान पूज्यश्री जया किशोरी ने श्रीहरि के अवतारों की कता वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को अच्छे मित्रों का नुनाव करने का भी ज्ञान दिया।

गोकर्ण और धुंधकारी की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि सांसारिक हार हार नहीं होती। मन से हार जाना हार है। कहा और बेहतर के लिए प्रयास करे परन्तु जो है उसका भी आनन्द लीजिए। कलयुग में भगवान को प्राप्त करने के दो ही मार्ग हैं। भक्ति और ज्ञान। भक्ति का पहला कदम समर्पण है। जो व्यक्ति के मैं को खत्म करता है। ज्ञानी में अहंकार हो सकता है, भक्त में नहीं। जब दुख में सुखी रहने लग जाओ तो समझ लेना कि समर्पण सीख लिया। क्योंकि भक्त किसी भी परिस्थिति में ईश्वर पर आरोप नहीं लगाते। स्वभाव चंदन सा हो तो सर्प का आना जाना लगा रहता है। अपना स्वभाव इतना अच्छा बनाओं कि सर्प के विष का भी प्रभाव प्रभावित न कर पाए। सति अनुसुइया, भक्त प्रह्लाद व वराह अवतार की कथा का भी भक्तिमय वर्णन किया।

आरती के साथ कथा विश्राम हुआ और सभी भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर मुख्य रूप से राजकुमार गुप्ता, विकास मागंलिक, अनिल गुप्ता, प्रदीप गुप्ता, रवि शंकर, संतोष शर्मा, गोपालदास पेठे वाले, अनिल मित्तल, हेमेन्द्र अग्रवाल (मातंगी), आलोक अग्रवाल, रेनू गुप्ता, राधा गुप्ता, ललिता शर्मा, कविता अग्रवाल, जयश्री मांगलिक, रेखा गुप्ता, अंजु मागंलिक आदि उपस्थित थे।

 

शिव-पार्वती विवाह के उत्सव में खूब झूमें श्रद्धालू

आगरा। शिव पार्वती का विवाह ब्रह्माण का सबसे पहला प्रेम विवाह था। जिससे प्रेम किया उसके लिए मां पार्वती ने दूसरा जन्म ले लिया। विवाह के उत्सव की इस कथा में कुछ भक्त बाराती बने तो कुछ घराती। भजन और झांकी के माद्यम से हल्दी लगी, तेल पुष्प वर्षा के साथ जयमाला की रस्में भी निभाई गईं। शिवजी बिहाने चले पालकी सजाएके, भभूति रमाएके हो राम…, झुक जाओ शिवजी… भजन और शिव पार्वती के स्वरूपों ने पण्डाल में विवाह के उत्सव का माहौल बना दिया।

 

 

जिसकी लागी रे लगन भगवान से उसका दिया रे जलेगा तूफान में…

आगरा। ढोलक और मंजीरे के संगीतमय धुन पर गोविन्द बोलो हरि गोपाल गोपाल बोलो… कीर्तन के साथ प्रारम्भ हुई श्रीमद्भागवत कथा में व्यासपीठ पर विराजमान पूज्य श्री जया किशोरी ने भजनों पर भक्तों ने न सिर्फ सुर से सुर मिलाए बल्कि भक्ति की मस्ती में डूबकर खूब नृत्य भी किया। जिसकी लागी रे लगन भगवान से, उसका दिया रे जलेगा तूफान में… भजन के माध्यम से ईश्वर के प्रति समर्पण का ज्ञान देते हुए कहा कि जब कोई साथ न दे तो सिर्फ भगवान ही सहारा बनता है। गोविन्द बोलो हरि गोपाल बोलो… कीर्तन और तेरे संग में रहेंगे ओ मोहना…, ओ राधा रानी मेरी है, मेरो है बरसाना… जैसे भजनों पर भक्ति की बहती गंगा की पावन धारा में हर भक्त थिरकता नजर या।