उर्दू अदब में गंगा-जमुनी तहज़ीब की अक्स” पर भव्य राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित

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“उर्दू अदब में गंगा-जमुनी तहज़ीब की अक्स” पर भव्य राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित

आगरा।अंजुमन हिमायत-ए-इस्लाम वेलफेयर सोसायटी, आगरा के तत्वावधान में और उत्तर प्रदेश सरकार के आर्थिक सहयोग से आज यूथ हॉस्टल, संजय प्लेस में एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार का विषय था “उर्दू अदब में गंगा-जमुनी तहज़ीब की अक्स”, जिसमें शहर और प्रदेश के प्रमुख विद्वानों, शिक्षाविदों और साहित्यकारों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

 

सत्र की अध्यक्षता सैय्यद फैज़ अली शाह नियाज़ी (सज्जादा नशीन, आस्ताना आलिया मेवा कटरा ) ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में बाल योगी (राष्ट्रीय अध्यक्ष, गरीब सेना) और विशिष्ट अतिथि के रूप में सैय्यद अदनान अशरफ (AICC मीडिया इंचार्ज) ने कार्यक्रम में भाग लेकर इसे शोभायमान किया।

 

इस अवसर पर शबाना खंडेलवाल, डॉ. सैयद सब्त हसन नकवी (सेंट जॉन्स कॉलेज, आगरा), डॉ. सादिया सलीम शम्सी, डॉ. नसीम अख्तर, और अजहर उमरी (सीनियर पत्रकार ) सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद रहे।

 

सैयद फैज़ अली शाह नियाज़ी ने कहा कि उर्दू अदब भारत की साझा संस्कृति का आईना है, जिसमें गंगा-जमुनी तहज़ीब की सुंदर झलक साफ़ दिखाई देती है। उन्होंने युवाओं को इस विरासत से जुड़ने की अपील की।

 

बाल योगी ने कहा कि भारत की असली ताकत उसकी विविधता में एकता है, और उर्दू अदब इस एकता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

 

सैयद अदनान अशरफ ने कहा कि उर्दू अदब हमेशा से प्रेम, सहिष्णुता और भाईचारे का संदेश देता आया है, जो आज के समय में और भी अधिक प्रासंगिक है।

 

शबाना खंडेलवाल ने कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है जिससे गंगा-जमुनी तहज़ीब को जीवित रखा जा सकता है। उर्दू अदब बच्चों में उच्च मूल्य, संस्कृति और इंसानियत को विकसित करता है।

 

डॉ. सैयद सब्त हसन नकवी ने कहा कि उर्दू अदब ज्ञान और तहज़ीब का संगम है और इसमें समाज को जोड़ने की अपार क्षमता मौजूद है।

 

डॉ. सादिया सलीम शम्सी ने कहा कि उर्दू अदब महिलाओं की आवाज़ को सशक्त बनाता है और समाज में समानता और न्याय का संदेश फैलाता है।

 

डॉ. नसीम अख्तर ने कहा कि गंगा-जमुनी तहज़ीब हमारी पहचान है और उर्दू अदब इसका सबसे मजबूत स्तंभ है।

 

अजहर उमरी ने कहा कि मीडिया की जिम्मेदारी है कि वह उर्दू अदब और गंगा-जमुनी तहज़ीब का संदेश आम लोगों तक पहुंचाए।

 

शोधपत्र प्रस्तुत करने वाले विद्वानों—हाफिज़ हबीब, हाफिज़ कलीमुद्दीन, हाफिज़ फैज़, हाफिज़ मोहम्मद नसरुल्लाह, मौलाना क़लामुद्दीन, हाफिज़ मोहम्मद नौशाद, सायमा कुरैशी रहमानी और मलिक हुसैन—ने अपने शोध पत्रों के माध्यम से गंगा-जमुनी तहज़ीब के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला और उर्दू अदब की अहमियत को उजागर किया।

 

कार्यक्रम में छात्रों, शिक्षकों और साहित्य प्रेमियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। पूरे दिन गंगा-जमुनी तहज़ीब और उर्दू अदब के संबंध पर गंभीर और ज्ञानवर्धक चर्चा हुई।

 

  1. अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों का धन्यवाद किया और इस संकल्प का उल्लेख किया कि भविष्य में भी ऐसे साहित्यिक कार्यक्रमों के माध्यम से सामाजिक समरसता और भाईचारे को बढ़ावा दिया जाएगा।