होम्योपैथी में इमरजेंसी उपचार और शोध की आवश्यकता पर मंथन
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ होमियोपैथिक फिजिशियंस की सीएमई में विशेषज्ञों ने रखे विचार

आगरा। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ होमियोपैथिक फिजिशियंस (IIHP) आगरा यूनिट द्वारा होम्योपैथी में इमरजेंसी स्थितियों के प्रबंधन विषय पर एक कंटीन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन (CME) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आए होम्योपैथिक चिकित्सकों एवं विशेषज्ञों ने भाग लेकर चिकित्सा क्षेत्र में नवीन शोध, उपचार पद्धतियों और आपातकालीन परिस्थितियों में होम्योपैथी की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की।
मुख्य वक्ता डॉ. पवन पारिख ने कहा कि वर्तमान समय में होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति की समाज में विशेष आवश्यकता है। यह उपचार पद्धति कम दुष्प्रभावों के साथ रोगों के मूल कारणों पर कार्य करती है। होम्योपैथी के क्षेत्र में नए शोधों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है, जिस दिशा में केंद्रीय होम्योपैथिक अनुसंधान संस्थान सहित विभिन्न संस्थाएं लगातार कार्य कर रही हैं। आपातकालीन परिस्थितियों में होम्योपैथिक औषधियों के उपयोग और उनके सकारात्मक परिणामों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आधुनिक शोधों के आधार पर ब्रेन हेमरेज जैसी गंभीर स्थितियों में भी होम्योपैथिक उपचार से उत्साहजनक परिणाम प्राप्त होने के संकेत मिले हैं।
विशिष्ट अतिथि नेशनल चीफ कॉर्डिनेटर डॉ. राजेन्द्र सिंह ने बताया कि सीएमई में उपस्थित चिकित्सकों ने होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति के वैज्ञानिक विकास, अनुसंधान को बढ़ावा देने तथा रोगियों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। बड़ी संख्या में चिकित्सकों और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने सहभागिता की। अध्यक्षता आगरा यूनिट के अध्यक्ष डॉ. एच. पाल ने की व संचालन डॉ. नाहर सिंह ने किया। धन्यवाद ज्ञापन सचिव डॉ. ओमकार सिंह ने किया।इस अवसर पर संयोजक डॉ. अशोक वार्ष्णेय, प्रदेश अध्यक्ष डॉ. ओ.पी. श्रीवास्तव, डॉ. ज्ञानेश पुरोहित, डॉ. अशोक सिंह चौहान, सुनील झा, डॉ. वीपी सिंह, डॉ. सुभाष गुप्ता, डॉ. हरेंद्र सिंह तोमर, देव प्रकाश राठौड़, डॉ. रोचक मिश्रा, राजेंद्र सिंह राजपूत, डॉ. विजय सिसोदिया, डॉ. विष्णु तोमर, अनिल शर्मा, सुनील कुमार आदि मौजूद रहे।


